Friday, February 19, 2010

मोती चूर का लड्डू

एक रात कैंटीन में दोस्तों से गप्पे लगा रहा था
यूँ समझो अपने जोक्स पे खुद ही मुस्कुरा रहा था
मेरी नज़र दूर बैठे मेरे एक करीबी मित्र राम पर पड़ी
मैंने देखा उसके साथ एक लड़की जैसी चीज़ थी खड़ी

वैसे तो वो कन्या मेरे दोस्त के साथ थी
पर दोस्ती इतनी करीबी थी, मुझे लगा मेरे ही पास थी
बात चलायी तो पता चला वो साली उसकी साली है
दोस्ती के नाते, आधी नहीं तो मेरी 1/4 घर वाली है

तो मैंने 1/4 घरवाली से बात बनाने के लिए बात चलायी
आखिर किस हक़ से खाने देता मेरे दोस्त को पूरी मलाई
पता चला रिंकू जीजा के यहाँ जीजी की delivery के लिए थी आई
फिर क्या… हमने अगले दिन से दोस्त के घर daily attendance लगायी

सोचा… भतीजे के साथ हमारे प्यार का भी जन्म होगा
मेरे एक हाथ में भतीजा और दूसरे में सनम होगा
दोस्त की साली से अब काफी खुल के बातें होने लगी थी
हिम्मत करके पूछ डाला "पानी मिलेगा? बड़ी प्यास लगी थी"

इतना कुछ हो तो आदमी की आशाएं बढ़ ही जाती हैं
दिल में कुछ कुछ होता है और चिड़िया चहचहाती हैं
मेरा तो अब काम में बिलकुल भी मन नहीं लगा करता था
मैं दिये की तरह जलता था जब राम रिंकू से बात करता था

मुझे दी घरवाली एक चौथाई और साले राम को दी डेढ़!
ऊपर से मैं बन गया था उनके घर का नौकर unpaid!
"भगवान् ये तेरा कैसा इन्साफ है… ये सब क्या बकवास है
राम के लिए मख्खन और मलाई और मेरे लिए बस छास है!"

मेरी पीड़ा देख लगता है भगवान् की आखें भर आयीं
साली की जीजी मेरे लिए एक दिन मोती चूर के लड्डू ले आयीं
मुझे लगा ये पहला sign है की जीजी को रिश्ता क़ुबूल है
क्या पता था की ऐसा सोचना मेरी सबसे बड़ी भूल है

जीजी बोली "भैया बधाई हो... रिंकू का रिश्ता हो गया है तय"
मेरा खूबसूरत सपना टूटा! सच हुआ मेरा सबसे बड़ा भय
"भैया… इनके साथ एक तरफ से तुम्हे भी उठानी होगी डोली
आखिर राम जैसे तुम भी इसके भाई हो" मेरी प्यारी जीजी बोली

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